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    Rebirth for crazy daddy and Psycho mommy

    वही खतरनाक घने जंगल के बीचो-बीच एक खंडहर से बड़े घर में इस समय एक लड़की की जोर‑जोर से चीखने की आवाज़ सुनाई दे रही थी। वही उसकी आवाज़ इतनी दर्दनाक थी कि किसी को भी वह आवाज़ सुनकर कलेजा कांप जाए। वही उस खंडहर के अंदर एक खूबसूरत लड़की कुर्सी से बंधी थी, उस लड़की के हाथों‑पैरों में मोटी‑मोटी चेन बंधी थी। वह बहुत ही ज्यादा कमजोर लग रही थी, उसकी पूरी बॉडी पर मार‑पीटने और ज़ख्मों के निशान थे, जैसे उसे बहुत टॉर्चर किया गया हो। वह लड़की बिल्कुल कमजोर, बेजान‑सी पड़ी हुई थी, जैसे उसमें कोई जान ही न हो। वही तभी वहाँ पर एक लड़की आती है, दिखने में तो वह सुंदर थी लेकिन उसने अपने चेहरे पर भर‑भर कर मेकअप किया हुआ था और तो और… वहीं उसे बेजान पड़ी लड़की को देखकर उसके चेहरे पर एक मक्कारी भरी स्माइल आ गई। तभी वह एक आदमी को इशारा करती है। वहीं उसका इशारा समझकर वह आदमी खौलता हुआ गरम पानी उस लड़की के ऊपर डाल देता है, जिससे उसकी दर्दनाक चीख उस खंडहर में गूंज उठती है, क्योंकि गरम पानी उसके ज़ख्मों पर पड़ने से उसे बहुत ही ज़्यादा दर्द हो रहा था। वहीं सामने खड़ी लड़की जब उसे कुर्सी पर बंधी लड़की को दर्द से तड़पते हुए देखती है, तो उसके चेहरे पर एक शैतानी स्माइल आ जाती है और वह कुर्सी पर बंधी लड़की को देखकर बोली— कैसी हो मेरी प्यारी छोटी बहन, उम्मीद है तुम यहाँ पर अच्छी ही होगी वहीं उस लड़की की आवाज़ सुनकर सामने घायल पड़ी बड़ी लड़की की आँखों में बेतहाशा नफ़रत उमड़ आती है और वह गुस्से और नफ़रत से उस लड़की को देखने लगती है। वहीं यह देखकर सामने खड़ी लड़की उस लड़की का मज़ाक उड़ाते हुए बोली— अरे यार सुहानी, मुझे इस तरह से मत देखो, क्योंकि मुझे तुमसे बहुत ज़्यादा डर लग रहा है। कहीं तुम मुझे नुकसान न पहुँचा दो। और इतना कहकर वह उससे डरने की एक्टिंग करने लगी। और एक्टिंग करने के कुछ समय बाद ही वह शैतानों की तरह ज़ोर-ज़ोर से हँसने लगी। फिर वह उस लड़की को देखकर हँसते हुए बोली— सचमुच सुहानी, मुझे तुम पर बहुत तरस आता है। जहाँ पर तुम नेगी परिवार की इकलौती बेटी हो, लेकिन तुम्हें वहाँ पर कोई नहीं पूछता। सब मुझसे प्यार करते हैं, जबकि तुम उनकी असली बेटी हो। फिर भी देखो ना, आज तुम इस हालत में हो और मैं तुम्हारे परिवार की इकलौती प्रिंसेस बनकर रह रही हूँ, जहाँ पर सब मुझ पर अपनी जान छिड़कते हैं और तुमसे—तुमसे तो सब नफ़रत करते हैं। देखो, तुम इतने दिन से यहाँ पर मेरी क़ैद में हो, लेकिन फिर भी तुम्हारे परिवार वालों को तुम्हारी कोई फ़िक्र ही नहीं है। उन्हें तो जैसे तुम्हें भूल ही गए हैं कि सुहानी नाम की उनकी कोई बेटी भी है वहीं उस लड़की की यानी कि मिताली की बात सुनकर सुहानी की आँखों में दर्द और कड़वाहट भरी मुस्कान over I ठीक है, जैसा लिखा है वैसा ही, एक-एक शब्द का भाव बदले बिना, हिंदी में— तभी मिताली उसे अपनी उँगली दिखाती है, जिसमें एक बहुत ही खूबसूरत अंगूठी थी। मिताली उसे अंगूठी दिखाते हुए ठहाका लगाकर बोली— “तुम्हें पता है सुहानी, आज विवेक ने मुझे शादी के लिए प्रपोज़ किया है। और उसने मुझसे कहा कि वह मुझसे बहुत ही ज़्यादा प्यार करता है। आज मैं बहुत ही ज़्यादा खुश हूँ, क्योंकि आज मैंने तुमसे तुम्हारा मंगेतर और तुम्हारा प्यार भी ज़िंदगी से छीन लिया।” वहीं उसकी बात सुनकर सुहानी को यक़ीन नहीं हुआ, क्योंकि विवेक उसे बचपन से जानता था। और वही तो था जो उससे अच्छे से बात करता था, उसे समझता था। तो वह सुहानी को प्रपोज़ कैसे कर सकता है। इसलिए वह अटकते हुए बोली— “तुम… तुम झूठ बोल रही हो। विवेक ऐसा नहीं कर सकता। वह मेरा दोस्त है।” वहीं उसकी बात सुनकर मिताली ज़ोर-ज़ोर से हँसते हुए बोली— “और मेरी प्यारी बहन, तुम्हें कितनी ज़्यादा ग़लतफ़हमी है ना। लेकिन तुम्हें नहीं पता शायद कि विवेक तुमसे नफ़रत करता है। और अब तो वह तुम्हारी शक्ल भी नहीं देखना चाहता। और मेरे लिए तो अब वह तुम्हें जान से मार भी सकता है। चलो, मैं तुम्हें आज एक ट्रेलर दिखाती हूँ।” और इतना कहकर वह अपना फ़ोन उठाकर कहीं से लगाकर रोते हुए बोली— “विवेक… विवेक, प्लीज़ मुझे बचाओ। सुहानी… सुहानी ने मुझे यहाँ पर किडनैप कर लिया है और वह मुझे मारने वाली है। प्लीज़ विवेक, मुझे बचा लो, मुझे बहुत डर लग रहा है। ठीक है, जैसा लिखा है वैसा ही, एक-एक शब्द का भाव बदले बिना, हिंदी में— और इतना कहकर उसने फ़ोन रख दिया और शैतानी मुस्कान लिए पहले सुहानी को देखती है और फिर दीवार के पास जाकर अपना सिर ज़ोर से दीवार से मार लेती है, जिससे उसके माथे से खून बहने लगा। और फिर उसके बाद वह सुहानी को छोड़ देने के लिए कहती है। वहीं उसके गार्ड्स जैसे ही सुहानी को छोड़ते हैं, तो सुहानी बिजली की रफ़्तार से मिताली के पास आकर उसका गला पकड़ लेती है। वहीं उसकी स्पीड देखकर मिताली बिल्कुल हैरान हो गई कि इतना टॉर्चर होने के बाद भी कोई इंसान कैसे दौड़ सकता है। वहीं सुहानी ने मिताली के गले पर अपनी पकड़ मज़बूत कर ली, क्योंकि वह जानती थी कि शायद आज उसका आख़िरी दिन है, लेकिन वह इस बीच मिताली को भी नहीं छोड़ना चाहती थी। वहीं वह उसका गला दबा ही रही थी, तभी उसके कंधे पर गोली आकर लगी, जिससे उसकी चीख निकल गई और वह सीधे ज़मीन पर गिर गई। वहीं उसके हाथों से लगातार खून बह रहा था। वहीं वह अपने सामने देखती है, जहाँ पर तीन लड़के और मिडिल एज का एक कपल आ रहा था। उनके चेहरे पर इस समय घबराहट थी ठीक है, जैसा लिखा है वैसा ही, एक-एक शब्द का भाव बदले बिना, हिंदी में— वहीं जैसे ही उनकी नज़र मिताली पर पड़ती है, वह लोग दौड़कर मिताली के पास जाते हैं और उसे अपने सीने से लगा लेते हैं। वहीं वह मिडिल एज औरत अपनी आँखों में आँसू लिए मिताली के सिर पर हाथ फेरते हुए बोली— “मेरी बच्ची, तू ठीक तो है ना?” वहीं उन्हें देखकर मिताली अपनी एक्टिंग कंटिन्यू करते हुए बोली— “मम्मा, मुझे बहुत दर्द हो रहा है।” वहीं उसकी बात सुनकर वह औरत उसके माथे पर देखती है, जहाँ से खून निकल रहा था। यह देखकर वह घबरा गई और अपने पति से बोली— “देखिए ना जी, हमारी प्रिंसेस को चोट लग गई है। कितना ज़्यादा खून बह रहा है। इसे जल्दी से हॉस्पिटल ले चलिए, मेरा दिल बहुत घबरा रहा है।” वहीं यह सुनकर मिताली शैतानी स्माइल लिए सुहानी को देखती है। वहीं यह सब देखकर सुहानी का तो जैसे दिल ही टूट गया। क्योंकि यह औरत उसकी सगी माँ थी, जिसने ही उसे जन्म दिया था। और उसे इतनी ज़्यादा चोट लगी है कि वह यहाँ मरने वाली है, फिर भी इस औरत ने उसे एक बार भी नहीं देखा। और अपनी गोद ली हुई बेटी, जिसे सिर्फ़ मामूली-सी खरोंच आई है, उसके दर्द को देखकर यह तड़प उठी। उसे आज इन सब लोगों से बहुत ही ज़्यादा नफ़रत हो रही थी। उसने अपनी पूरी ज़िंदगी में इन लोगों का प्यार पाने के लिए न जाने क्या-क्या किया, लेकिन उसे बदले में सिर्फ़ नफ़रत और ताने ही मिले। वहीं उसका पूरा परिवार होने के बाद भी उसने अनाथों जैसी ज़िंदगी जी। उसके माँ-बाप और भाई के लिए तो जैसे वह इस दुनिया में एडजस्ट ही नहीं करती थी। उनके लिए तो सिर्फ़ उनकी गोद ली हुई बेटी ही उनकी पूरी दुनिया थी। वहीं जब वह औरत सुहानी को देखती है, तो उसके चेहरे पर नफ़रत के भाव आ जाते हैं और वह नफ़रत से सुहानी की तरफ देखकर बोली— “यह सब इस घटिया और मनहूस लड़की ने किया है। मुझे तो यक़ीन ही नहीं होता कि यह मेरी कोख से जन्मी है। यह इतनी घटिया कैसे हो सकती है? अच्छा होता अगर यह पैदा होते ही मर जाती। अगर यह पैदा होते ही मर जाती, तो आज यह मेरी बेटी को नुकसान नहीं पहुँचाती। पता नहीं क्या दुश्मनी है इसकी मेरी बेटी से।” वहीं उसकी बात सुनकर मिताली रोते हुए बोली— “मम्मा, प्लीज़ सुहानी को कुछ मत बोलिए, ऐसा मत बोलिए…” तो उसकी बात सुनकर “वह मेरी बहन तो है।” उसकी बात सुनकर विवेक बोला— “मिताली, तुम इतनी मासूम और अच्छी हो, इसलिए तुम्हें सब अच्छे दिखते हैं। लेकिन यह घटिया लड़की तुम्हारे इस प्यार और भरोसे के लायक नहीं है। देखो, इसकी वजह से आज तुम्हारी क्या हालत हो गई है।” उसकी बात सुनकर मिताली रोते हुए बोली— “विवेक, प्लीज़ ऐसा मत बोलो। वह मॉम-डैड की रियल बेटी है।” तो उसकी बात सुनकर वह औरत नफ़रत से सुहानी को घूरते हुए बोली— “नहीं बच्चा, यह लड़की मेरी कुछ नहीं लगती। मेरी सिर्फ़ एक ही बेटी है और वह तुम हो।” वहीं उस औरत की बात सुनकर मिताली के चेहरे पर शैतानी स्माइल आ गई, जिसे उसने वक़्त रहते छुपा लिया। वहीं सुहानी के चेहरे पर यह सब सुनकर नफ़रत उभर आई। वह सामने देखती है, वहीं ठीक है, जैसा लिखा है वैसा ही, एक-एक शब्द का भाव बदले बिना, हिंदी में— वहीं वह इस समय उठने की कोशिश करती है। यह देखकर मिताली रोते हुए बोली— “सुहानी, प्लीज़… सुहानी, प्लीज़ मुझे कुछ मत करना। मैं यह घर छोड़कर चली जाऊँगी। सुहानी, प्लीज़ मुझे कुछ मत करना।” वहीं उसे उठता देखकर उन लोगों को लगता है कि सुहानी ज़रूर उनकी प्रिंसेस पर हमला करने वाली थी, इसलिए उसका बड़ा भाई अपने हाथ में पकड़ी बंदूक से सुहानी के ऊपर शूट कर देता है, जिससे वह गोली सुहानी के सीने पर लगती है और वह धड़ाम से नीचे गिरती है। वहीं इस समय वह दर्द से तड़प रही थी, लेकिन इस समय उसकी आँखों में गहरी नफ़रत थी। वह उन सबको देखते हुए बोली— “अब तक तुम लोगों ने सिर्फ़ मेरा प्यार देखा है, लेकिन अब मैं तुम लोगों से नफ़रत करती हूँ। और अगर… अगर मैं कभी वापस लौटकर आई, तो तुम सबको खून के आँसू रुलाऊँगी। इतना तड़पाऊँगी कि तुम लोगों को मौत भी प्यारी लगने लगेगी।” और इतना कहकर उसके मुँह से खून निकलता है और उसकी दिल की धड़कनें हमेशा के लिए रुक जाती हैं। वहीं उसकी यह बातें सुनकर उसके परिवार के दिल में थोड़ी टीस होती है, लेकिन वह अपनी गोद ली हुई बेटी के प्यार में इतने अंधे थे कि उन्हें अपनी सगी बेटी दिखाई नहीं दे रही थी। इसलिए वह उसे छोड़कर मिताली को लेकर वहाँ से चले गए। वहीं उन सबके जाने के बाद उन गुंडों ने उस घर में आग लगा दी। वहीं दूसरी तरफ़ एक हॉस्पिटल रूम में एक खूबसूरत-सी लड़की बेड पर बेजान लेटी हुई थी। वहीं उसके बगल में एक 35–36 साल का हैंडसम-सा आदमी बैठा हुआ था। वह इस समय बच्चों की तरह सिसक-सिसक कर रोते हुए उस लड़की को देखकर बोला— “परी… परी, क्या तुम मुझसे नाराज़ हो? प्लीज़ परी, अपने डैडी से नाराज़ मत हो। मैं तुम्हें… मैं तुम्हें अपनी सारी चॉकलेट दे दूँगा, पर प्लीज़ परी, तुम अपने डैडी से नाराज़ मत हो।” फिर वह उसी वार्ड में खड़ी एक औरत को देखकर बोला— “मम्मा, परी आँखें क्यों नहीं खोल रही? क्या मैं इतना गंदा बच्चा हूँ, जो परी मुझसे नाराज़ है?

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